मेरी मृत्यु के बदले मुझे थोडी ज़मी दे दो
ऐसा करो अपने दिल में कहीं दे दो
रोक नही पा रहा हूँ आकाल से त्रस्त उन्माद को हृदय में
मुझे अपने स्पर्श से उत्पतित थोडी नमी दे दो
कही तुमने अपने करों के द्वार फैलाये तो होंगे
भीतर आने को व्याकुल मुझे आतुर रौशनी दे दो
संघर्षों के फेर में भटके अपरिचित घोषित हो चुका हूँ
अब तो आगंतुक दृष्टि में विचरित चांदनी दे दो
सिमित नही होता है किसी की आशाओं का पोखर
भर सकूं जहाँ उज्जवल निधि वहीं दे दो
मेरी मृत्यु के बदले मुझे थोडी ज़मी दे दो
ऐसा करो अपने दिल में कहीं दे दो
1 comment:
Amazing imagery !!! Jiyo yaar !! Kya baat hain !!!
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