Tuesday, September 11, 2012

बातों का मतलब

दिल की सिलवटो को जब गिनने बैठोगे
तब समझोगे कि मेरी बातों का मतलब क्या है 

हाथों में जब अपनी शक्ल लेकर बैठोगे 
तब समझोगे कि मेरी बातों का मतलब क्या है 

अब तो बस शाम ही बाकी है 
जो कभी कुछ गुस्से में कह जाती है 
तुम जब धुप का मिजाज़ चख कर देखोगे 
तब समझोगे कि मेरी बातों का मतलब क्या है 

कल सर्दी की बहार फिर आयी थी 
साथ कुछ सुखी पत्तियां लेकर 
उस के रंगों को जब पकड़कर देखोगे 
तब समझोगे कि मेरी बातों का मतलब क्या है 

शहर की सडको ने भी अब 
किनारे डेरे लगाना बंद कर दिया है 
अकेले जब भी वहां से गुजरोगे
तब समझोगे कि मेरी बातों का मतलब क्या है