Saturday, January 24, 2009

मकान

अधूरा बना मकान
ईंट रेत पत्थरों से मिलकर
सुंदर पौधों की छोटी क्यारिओं से घिर कर
अपने बगीचे को एक - टक निहारता
अधूरा खड़ा मकान

अपने आँगन में नन्हे पैरों के निशानों से सज कर
अपनी दीवारों को पेंसिल के चित्रों से भर कर
बचपन के कोमल हाथों को थामे
आसमान से बड़ा मकान
अधूरा खड़ा मकान

अपने दरवाजों पर राखी के धागों से बंध कर
अपनी डोलियों पर दिवाली के दीयों को रख कर
किसी की भावनाओं से अंत तक जुडा मकान
अधूरा खड़ा मकान

अपने चौखट पर रंगीन माडनों को सहेज कर
अपनी दीवारों में लज़ीज़ पकवानों की खुशबु को समेट कर
हर त्यौहार के लिए बेसब्री से
इंतज़ार में खड़ा मकान
अधूरा बना मकान

2 comments:

Unknown said...

Puneet likes this one :)

Pavil said...

Muze mere bachpan ka, Gali ke kone wala tuta makaan yaad aaya !!!
& It shows Home as a human being !!!