Wednesday, July 22, 2009

मेरी इच्छा

ऐ काश मेरे दो पंख होते
उड़ता रहता गगन में
तितली चिडियों की प्रेम की बातें
सुनता रहता मगन मैं

चिडियों के घर को जा के सजाता
तिनको को बुन के खिलौने बनाता
करता रहता सृजन मैं

तितली के सारे फूलों से मिलता
रंगों से अपनी जेबों को भरता
खोया रहता सुगंध में

बादल के आँगन में बारिश उगाता
सागर का रस्ता हवा को दिखाता
खेला करता पवन में

तारों की झिलमिल में रातें बिताता
परियों को धरती के गाने सुनाता
गाता रहता भुवन में

ऐ काश मेरे दो पंख होते
उड़ता बनाता गगन में
तितली चिडियों की प्रेम की बातें
सुनता रहता मगन मैं

3 comments:

Unknown said...

aapke iccha sach mein bahut romanchak hai..aapke liye dua hai, aapke har iccha poore ho, aap humesha muskurate rahein..khush rahein, titliyon ke tarah har disha mein apne khusiyon ke rang bhikherte rahein..
very nice though and too good words to express your feelings..awesome..

Pavil said...

Kya baat hain !!!!Mazaa aa gayaa !!!

dhiraj.salian said...

Great man!!