होते कौन हैं ये हमें डराने वाले ?
होते कौन हैं ये हमें धमकाने वाले ?
कौन हैं जो ललकार रहे हैं हमारी अखंडता को ?
कौन हैं जो पुकार रहे हैं हमारी क्षमता को ?
क्या ये जानते नहीं हैं कि ?
हम चीर सकते हैं दुश्मन का कलेजा हमारी तीसरी आँख से
हम छीन सकते हैं इनका जीवन हमारे खडग के वार मात्र से
या ये वाकिफ ही नहीं हैं हमारी एकता की मज़बूत नीवों से
और वाकिफ नहीं हैं हमारी ताकत की सख्त ईटों से
तो आओ दिखा दे इन्हें कि कितना शोर है हमारे शास्त्रों के आगाज़ में
और गाड दे मृत्यु के ध्वज इनके सरों में
सही सत्य है क्योंकि ये ही स्तिथि है
तिरंगे का अपमान करने पर निश्चित ही ये नियति है
3 comments:
Good one!!! keep it up
great!! poems ...i didnt know you were this good...
hey man good one ...upload some more poems..!!!
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