Wednesday, December 29, 2010

कुत्तों की बहस

इक बार कुत्तों में छिड़ी बहस देखो
की कौन कितना बलवान है
कौन सबसे बड़ा पहलवान है
कौन जोर जोर से गुर्राता है
कौन गली गली भुकियाता है

इतना होना काफी था उन को उकसाने के लिए
सब के सब बेताब हुए अपना जौहर दिखलाने के लिए
तब क्या था, हर कुत्ता अपना गला फाड़ने लगा
इक दुसरे को देख हर कोई जोर जोर से दहाड़ने लगा

पर उन में इक पिल्ला था भोला भला
थोडा छोटा था और था आधा काला
उस को न समझा ये खेल निराला
और बेकार लगा व्यर्थ उर्जा गंवाना

बेचारा मुहं झुका के वहां से निकला
और इक अच्छे से कोने में जा बैठा
पहले तो अंगड़ाई ले खुजलाया अपना सर
फिर शुरू किया पूछ से बतियाना

वहीं शर्मा जी दुसरे माले पे अलसाए पड़े थे
दोपहर के खाने के बाद सुस्ताये पड़े थे
मगर अब कुत्तों की जंग का शोर तेज़ होने लगा था
और शर्मा की नींद में खलल पड़ने लगा था

जब टूटी नींद तो शर्मा को आया गुस्सा आया
खिड़की खोली और चौकीदार पे झल्लाया
की ये क्या नाटक लगा रखा है
दोपहर की नींद को भी आफत बना रखा है

सुन चौकीदार ने उठाया अपना डंडा
और मचा दिया कुत्तों के झुण्ड में दंगा
सब के पिछवाड़े पे जो उस ने डंडे बरसाए
दुम दबा के भाग कुत्तों ने अपने प्राण बचाए

वो पिल्ला अभी भी बैठा सब देख रहा था
और अपनी सांस दबाये ये सोच रहा था
की जो फ़ालतू के पचड़ो में अपनी टांग अडाता है
कुछ नहीं मिलता उसे और डंडे पिछवाड़े पे खाता है

3 comments:

Unknown said...

nice..baaton he baaton mein kaffi bade baat bata de aapne..bahas to kutton ke the,par ishara hum inssano ko he jata hai..good attempt to convey a nice message in your superb words..as always,you rock :)

Pavil said...

good one. I would try to explain the same to the dogs in my society. :-)

Unknown said...

Excellent yaar ! Big lesson in simple words!!